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क्यूँ सूखे है मनरेगा के तालाब…?

गावों से पलायन रोकने और ग्रामीणों को गावों में ही रोज़गार उपलव्ध करने के उद्देश्य से सरकार ने २ फरवरी २००६ को देश के दो सौ जिलों से राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम की शुरुआत की | इसे विस्तार देते हुए १ अप्रैल २००८ तक  देश के सभी ५९३ जिलों में लागू कर दिया गया | बाद में इसका नाम महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम रख दिया गया | आज इसे मनरेगा के नाम से जाना जाता है | इस अधिनियम के लागू होने के साथ ही गावों में रहने वाले सभी वयस्क स्त्री पुरुषों को साल में सौ दिन रोज़गार पाने का कानूनी अधिकार मिल गया |
इसके साथ ही गावों में शुरू हुए विभिन्न निर्माण कार्य | इसी के तहत उत्तर प्रदेश के हर गाँव में तालाब बनाने की महत्वाकांक्षी योजना अमल में आयी | आज प्रदेश के लगभग हर गाँव में तालाब है | लेकिन कुछ एक को छोड़ दिया जाये तो तो अधिकतर तालाब सूखे पड़े हैं | आखिर क्यों सूखे हैं मनरेगा के तहत बनने वाले तालाब…? इसके मुख्य तीन कारण हैं –
पहला- तालाब कहाँ बने …? यह गावों से दूर अपने कार्यालयों में बैठे अधिकारीयों ने तय किया | इन अधिकारीयों को गावों से कोई लेना देना नहीं ये तो सिर्फ नाम के लिए गावों के अधिकारी हैं, जो कभी कभार मजबूरी में ही गावों का रुख करते हैं | मतलब ये की तालाब बनाने की ज़मीन तय करने में लापरवाही बरती   गयी | तालाब उन बंजर और ऊंची ज़मीनों पर बने जहाँ बरसात का पानी भी नहीं रुकता |
दूसरा- तालाब बनवाने की प्रक्रिया में गावों के बाशिंदों को शामिल नहीं किया गया | आखिर अपने गाँव के बारे में वहां के बाशिंदों से अच्छा भला और कौन जानेगा | तालाब कहाँ बने ये गाँव वालों से बेहतर और कौन बता सकता है | सदियों पहले गाँव वालों द्वारा बनाये गए तालाब आज साल के बारह महीनों पानी से लबरेज़ रहते हैं |
तीसरा- यह सबसे महत्वपूर्ण कारण है | गावों में आज भी कोई ड्रेनेज सिस्टम नहीं होता है, बेकार घरेलु पानी इधर-उधर फैलता रहता है या गावों के बाहर छोटे गड्ढों में जमा होता है | मनरेगा के तहत बनने वाले तालाबों तक इसकी पहुँच ही नहीं है |
गावों में तालाब बनाने की महत्वकांक्षी योजना शुरू करने से पहले होना तो ये चाहिए था कि गोवों में ड्रेनेज सिस्टम को विकसित किया जाता | इस योजना में गाँव वालों को शामिल किया जाता, उनके राय मशविरा से तालाब गाँव की ऐसी नीची जगह पर बनने चाहिए थे जहाँ गाँव का बेकार घरेलु पानी इकठ्ठा होता रहता |  इन तालाबों के रखरखाव की ज़िम्मेदारी में भी गाँव वालों की भागीदारी सुनिश्चित की जाती | अगर ऐसा होता तो आज सूखे और उपेक्षित पड़े तालाब पानी से लबरेज़ होते और गाँव की सुन्दरता में चार चाँद लगाते नज़र आते |

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4 विचार “क्यूँ सूखे है मनरेगा के तालाब…?&rdquo पर;

  1. यह सवाल उन लोंगों से पूछना चाहिए जो इसके जिम्मेदार है |

  2. यह सवाल उन लोंगों से पूछना चाहिए जो इसके जिम्मेदार है

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